बालार्क सूर्य मंदिर   

बालार्क सूर्य मंदिर   

सनातन धर्म और सनातन संस्कृति में सूर्य पूजन का इतिहास बहुत पुराना है ।  सनातन धर्म के आदि पंचदेवों में एक सूर्य देव भी हैं  जिन्हे कलयुग का एकमात्र दिखाई देने वाला देव कहा जाता है और ये पूरे ब्रह्माण्ड को अपने प्रकाश से प्रकाशित करते हैं ।

सूर्य को देव या यूं कहे तो सूर्य नारायण मानते हुए देश में बहुत से जगहों पर सूर्य मंदिरों  का भी समय-समय पर  निर्माण होता रहा है जो आज भी कई रहस्य को समेटे हुए है।

जानकारी के अनुसार भारत  में मौजूद प्राचीन सूर्य मंदिर वर्तमान में इतिहास के साक्षी बने हैं । कुछ मंदिर यथावत हैं और कुछ मंदिरों का मुस्लिम शासकों द्वारा विध्वंस कर दिया गया जबकि कुछ मंदिर अपने असली आकार में नहीं है लेकिन फिर भी इतिहास की अनेक कहानियों को समेटे हुए हैं ।  

भारत वर्ष में उपस्थित सभी सूर्य मंदिर में से बालार्क सूर्य मंदिर एक है जो  देवर्षि देवल धाम पर स्थित है,

बालार्क सूर्य मंदिर के निर्माण के संबंध में तीन प्रकार के  मत और लेख प्राप्त हुए हैं  जिसका वर्णन नीचे किया गया है

प्रथम मत / लेख :-

माग्व्येक्ति ग्रन्थ साम्ब पुराण के अनुसार कहा गया है कि भगवान कृष्ण के वंशज साम्ब को कुष्ठ व्याधि हुई जिससे मुक्ति के लिये साम्ब ने पृथ्वीलोक में ७ जगहों पर भव्य सूर्य मन्दिर बनवाए थे और भगवान सूर्य की आराधना की थी, तब साम्ब को कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली थी। उन्ही ७  मन्दिरो में बालार्क सूर्य मंदिर भी एक है।

साम्ब के द्वारा बनाये गए  इस पृथ्वीलोक में सात सूर्य मंदिर के निर्माण का वर्णन मिलता है, जो अतीव प्राचीनतम हैं । ये मंदिर निम्नलिखित हैं - 

०१.  उलार्क सूर्य मंदिर                        -    यह बिहार के पटना जिला में पटना से ५० किलोमीटर दक्षिण में   पालीगंज के पास उलार में । 
०२.  पुंडार्क सूर्य मंदिर                        -    बिहार की राजधानी पटना से 72 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में बाढ़ अनुमंडल के पंडारक प्रखंड में।  
०३.   मार्कण्डेयार्क/मार्तण्ड सूर्य मंदिर    -     यह भारत की उत्तरी तरफ जम्मू काश्मीर में।
०४.   बालार्क सूर्य मंदिर                     -  उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के देवकली देवलास में। 
०५.   लोलार्क सूर्य मंदिर                     -     उत्तर प्रदेश के वाराणसी में तुलसीघाट के निकट। 
०६.   कोणार्क सूर्य मंदिर                     -     उड़ीसा राज्य में जगन्नाथ पुरी से ३५ किमी उत्तर-पूर्व में कोणार्क नामक शहर में। 
०७.  चाणार्क सूर्य मंदिर                      -      प्रमाचार की पुष्टि नहीं है। 
 
इनमें से एक सूर्य मंदिर बालार्क के नाम से  है।आज के समय में वह बालार्क मंदिर यही देवर्षि देवल धाम (बालार्क सूर्य मंदिर) है जहां आज भी भगवान सूर्य के बाल रूप की पूजा / उपासना की जाती है|

द्वितीय मत / लेख :-


दूसरे मत को भगवान राम के साथ जोड़ के देखा जाता है । इस संबंध में दो तरह की बातें कहीं जाती हैं । एक तो यह कि भगवान राम ने वनगमन के समय इस स्‍थान पर रात्रि विश्राम किया था और यहॉं सूर्य की उपासना करने के बाद सूर्य मंदिर के निर्माण हेतु आधारशिला रखी और बाद में गुप्‍त कालीन शासक विक्रमादित्‍य ने यहां सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया । यह मत व्‍यक्‍त करने वाले लोग रामचरित मानस की पंक्ति बालक वृद्ध बिहाई गृह, लगे लोग सब साथ ।। तमसा तीर निवासु किय, प्रथम दिवस रघुनाथ का उल्‍लेख करते हुए कहते हैं कि उस समय तमसा नदी देवलास के पास ही बहा करती थी ।

तृतीय मत / लेख :-

तीसरा मत यह है कि वन गमन के समय नहीं बल्कि मुनि विश्वामित्र के साथ ताड़का वध के लिए बक्सर जाते समय भगवान राम ने यहॉं रात्रि विश्राम किया था और फिर सूर्योपासना करने के बाद सूर्य मंदिर के निर्माण हेतु आधारशिला रखी थी और बाद में महाराजा विक्रमादित्‍य ने यहां सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया ।

इन तथ्‍यों में कितनी सच्‍चाई है यह अनुसंधान का विषय है । लेकिन सत्‍य चाहे जो भी हो पर देवलास की ऐतिहासिकता और पुरातनता-पौराणिकता को झुठलाया नहीं जा सकता । इस स्‍थान का संबंध इक्ष्‍वाकु वंश के सूर्यवंशी राजाओं से और बाद में गुप्‍त कालीन शासक महाराजा विक्रमादित्‍य से अवश्‍य रहा है ।

बालार्क सूर्य मंदिर का निर्माण मिट्टी, चूना, लकड़ियों व पत्थर का प्रयोग करके हुआ है ।  समय-समय पर इसमें समितियों व क्षेत्रीय जनता के सहयोग से टाइल्स व पत्थरों से सुंदरीकरण का कार्य कराया गया परन्तु मंदिर की प्राचीनता व भव्यता अभी भी मौजूद है।   

 

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से-

        यह सूची भारत में सूर्य - मंदिरों की है जिनका निर्माण ६वीं शताब्दी से २०वीं शताब्दी के मध्य हुआ, जो अभी भी मौजूद है  :-

  •  मोदेरा सूर्य मंदिर,  मेहसाना गुजरात 
  • कटारमल सूर्य मन्दिर, अल्मोड़ा उत्तराखंड 
  • रनकपुर सूर्य मंदिर,  रणकपुर राजस्थान 
  • सूर्य पहर मंदिर, गुहावटी असम
  • सूर्य मंदिर, प्रतापगढ़  उत्तर प्रदेश 
  • दक्षिणार्क सूर्य मंदिर,  गया बिहार 
  • देव सूर्य मंदिर,  औरंगाबाद बिहार 
  • औंगारी सूर्य मंदिर, नालंदा बिहार 
  • बेलार्क सूर्य मंदिर, भोजपुर बिहार 
  • सूर्य मंदिर,  हंडिया उत्तर प्रदेश 
  • सूर्य मंदिर, गया
  • सूर्य मंदिर, महोबा
  • रहली का सूर्य मंदिर, बुंदेलखंड 
  • सूर्य मंदिर, झालावाड़
  • सूर्य मंदिर, रांची
  • सूर्य मंदिर, जम्मू
  • सूर्य मंदिर,  सहरसा कंदाहा                            

                                                                                                                                      सादर धन्यवाद /आभार  -                                                                                                                                                                                    पं० श्याम सुन्दर पांडेय                                                                                                                             की विवेचना के आधार पर यह लेख प्रस्तुत हुआ।

 

    आगे यदि और अधिक जानकारी प्राप्त होती है तो इस लेख  में अद्यतन होता रहेगा।